Career in Statistics / स्टेटिस्टिक्स में कैरियर

What: Statistics is a branch of mathematics that deals with the collection, analysis, interpretation, and presentation of masses of numerical data. Statisticians collect, verify and interpret data and use the same to solve problems in a wide variety of fields. The services of a statistician are required in every field right from government offices to international sporting events. The job of statistician is not something out of the world, but something that affects each one of us in one way or the other.

Different areas of statistics are crime statistics, census statistics, ecological statistics, medical statistics, statistics on job seekers, on education, film statistics, cricket statistics, oil statistics, market statistics, accident statistics, labour statistics, population statistics, election statistics, district-city-state statistics, tourism statistics etc. All these areas require the analytical brain and comprehending ability of a statistician to interpret numerical data and explain to the common person.

A university graduate in statistics can have a large number of jobs in all kinds of organizations: government, private-funded, and aided organizations. If any student wants to study ahead in the field of statistics or any of its related branches, there are a number of courses offered at post-graduation degree, diploma, and certification levels in many universities across the country.

The starting salary in multi-national companies is in the range of 3 to 4.5 lacs per annum. One can also complete studies side by side and take up an employment to make money simultaneously.  

How: Once students complete their B.Sc. in Statistics, they are eligible to apply for a large number of jobs in both the government and the private sector. Statistics has great application in many fields and industries such as bio-informatics, finance, data mining, management science, information technology, etc.

A student can work under the Actuarial Science department in financial markets and share trading organizations. Under the private sector, a student after completing B.Sc. in statistics can join a multi-national company (MNC) as a business analyst, software engineer, statistic analyst, investigation officer, and researcher, among others. A student can also take up lectureship as an option after completing higher studies in Statistics and join a college or a university as a Professor or Lecturer of Statistics.

One can also join the Indian Statistical Services (ISS) in the government sector and join the top-notch people such as IAS, IFS, and other high-rank officers. To get into ISS, a student has to appear and clear the Union Public Service Commission (UPSC) examination. However, one can apply for this service only after achieving a post-graduation degree (or equivalent qualification) in Statistics or Mathematics.

A student of statistics can also enter the staff selection commission (SSC) for the post of Statistical Investigators Officer. One can also join the Information Technology (IT), Insurance, or the Banking industry and pursue a job of interest.

Where: Almost every country in this world has their own statistical agencies or bureaus. The apex body of the official statistical system in India is the Department of Statistics in the Ministry of Planning and Programme Implementation. This department acts as the nodal agency for the planned development of the country’s statistical system. It comprises the Central Statistical Organisation, the National Sample Survey Organisation etc. This body also administers the Indian Statistical Institutes – the most prestigious statistical studies institutes in the country.


  • Department of Statistics, Punjab University, Patiala
  • Department of Statistics, University of Madras, Chennai
  • Indian Statistical Institute, Kolkata

क्याः स्टेटिस्टिक्स मैथमैटिक्स की एक शाखा है जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर संख्यात्मक डेटा का संग्रह, विश्लेषण, व्याख्या व प्रस्तुति की जाती है। स्टेटिस्टिशियन द्वारा डेटा को कलेक्ट करके उनको सत्यापित करने के बाद उनका विश्लेषण किया जाता है और फिर इनका इस्तेमाल विविध समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है। स्टेटिस्टिशियन की सेवाओं का आवश्यकता सराकारी कार्यालयों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं तक हर जगह पड़ती है। स्टेटिस्टिशियन का काम इस दुनिया से बाहर का नहीं होता है लेकिन उनके कार्यों से हम लोग किसी ना किसी तरह प्रभावित जरुर होते हैं।

स्टेटिस्टिक्स के अंतर्गत आने वाले विषयों में क्राइम स्टेटिस्टिक्स, सेंशस स्टेटिस्टिक्स, इकोलॉजिकल स्टेटिस्टिक्स, फिल्म स्टेटिस्टिक्स, क्रिकेट स्टेटिस्टिक्स, ऑयल स्टेटिस्टिक्स, मार्केट स्टेटिस्टिक्स, एक्सिडेंट स्टेटिस्टिक्स, लेबर स्टेटिस्टिक्स, पॉपुलेशन स्टेटिस्टिक्स, इलेक्शन स्टेटिस्टिक्स, डिस्ट्रिक्ट-सिटी-स्टेट स्टेटिस्टिक्स, टूरिज्म स्टेटिस्टिक्स जैसे आँकड़ों के विभिन्न क्षेत्रों में अपराध के आँकड़ों, जनगणना के आँकड़े, पारिस्थितिक सांख्यिकी, चिकित्सा कर रहे हैं सांख्यिकी, शिक्षा पर नौकरी चाहने वालों, फिल्म के आँकड़े, क्रिकेट के आँकड़े, तेल के आँकड़े पर आँकड़े, बाजार के आँकड़े, दुर्घटना के आँकड़े, श्रम सांख्यिकी, जनसंख्या के आँकड़े, चुनाव के आँकड़े, आदि जिला-शहर-राज्य सांख्यिकी, पर्यटन आँकड़े इन सभी क्षेत्रों विश्लेषणात्मक मस्तिष्क की आवश्यकता होती है और एक सांख्यिकीविद् की क्षमता को समझने संख्यात्मक डेटा की व्याख्या और आम को समझाने के लिए व्यक्ति।

स्टेटिस्टिक्स में यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट के लिए हर तरह के ऑर्गेनाइजेशंस में जॉब की असीम संभावनाएं मौजूद हैः गवर्नमेंट, प्राइवेट-फंडेड व एडेड ऑर्गेनाइजेशन। अगर कोई विद्यार्थी स्टेटिस्टिक्स या इसकी किसी शाखा में आगे पढ़ाई करना चाहते हैं तो उनके लिए पोस्ट-ग्रेजुएशन, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट लेवल के कई कोर्सेज देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हैं।

बहु-राष्ट्रीय कंपनियों में शुरूआती वेतन प्रतिवर्ष 3 से 4.5 लाख रुपये के बीच होता है। कोई चाहे तो जॉब करते हुए भी पढ़ाई को जारी रख सकता है।

कैसे: स्टेटिस्टिक्स में बीएससी करने के बाद छात्र गवर्नमेंट व प्राइवेट दोनो सेक्टर में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं। बायो-इंफोर्मेटिक्स, फाइनेंस, डेटा माइनिंग, मैनेजमेंट साइंस और इंफोर्मेंशन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में स्टेटिस्टिक्स की काफी जरुरत होती है।

छात्र फाइनेशियल मार्केट्स व शेयर ट्रेड ऑर्गेनाइजेशंस के एक्चुरियल साइंस डिपार्टमेंट में काम कर सकते हैं। वहीं स्टेटिस्टिक्स में बीएससी करने के बाद प्राइवेट सेक्टर के किसी मल्टी-नेशनल कंपनी(एमएनसी) में में व्यापार विश्लेषक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, स्टेटिस्टिक्स विश्लेषक, इंवेस्टिगेशन ऑफिसर व रिसर्चर के तौर पर काम कर सकते हैं। छात्र चाहे तो स्टेटिस्टिक्स में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में स्टेटिस्टिक्स के प्रोफेसर या लेक्चरर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।

इसके अलावा कोई चाहे तो इंडियन स्टेटिस्टिकल सर्विस (आईएसएस) की परीक्षा पास करके आईएस व आईएफएस की तरह हाई रेंक का ऑफिसर बन सकता है। आईएसएस बनने के लिए छात्र को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षा पास करनी होती है। हालांकि, इस सेवा के लिए कोई स्टेटिस्टिक्स या मैथमैटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन (या समकक्ष योग्यता) के बाद ही आवेदन कर सकता हैं।

स्टेटिस्टिक्स के छात्र कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के माध्यम से स्टेटिस्टिकल इंवेस्टीगेशन ऑफिसर भी बन सकते हैं। इसके अलावा स्टेटिस्टिक्स के छात्रों के लिए इंफोर्मेंशन टेक्नोलॉजी (आईटी), इंश्योरेंस व बैंकिंग इंडस्ट्री में भी रोजगार के ढ़ेरो अवसर उपलब्ध है।

कहांः दुनिया में तकरीबन हर देश के पास अपनी स्टेटिस्टिकल एजेंसी या ब्यूरो है। भारत में स्टेटिस्टिकल सिस्टम की शीर्ष निकाय योजना और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का डिपार्टमेंट ऑफ स्टेटिस्टिक्स है। यह विभाग देश स्टेटिस्टिकल सिस्टम के नियोजन व विकास में नोडल एजेंसी को तौर पर काम करता है। इसके अंतर्गत सेंट्रल स्टेटिस्टिकल ऑर्गेनाइजेशन और नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन आदि शामिल। इसके अलावा इस निकाय द्वारा देश के सबसे प्रतिष्ठित सांख्यिकीय अध्ययन केंद्र – इडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टिट्यूट का भी संचालन किया जाता है।

ऽ डिपार्टमेंट ऑफ स्टेटिस्टिक्स, पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला
ऽ डिपार्टमेंट ऑफ स्टेटिस्टिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई
ऽ इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टिट्यूट, कोलकाता

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