Career in Physiotherapy / फिजियोथेरेपी में करियर

What: The history of Physiotherapy or Physical Therapy can be traced back to ancient Greece in the era of Hippocrates. Considered one of the oldest methods to cure various physical ailments, physiotherapy has evolved from simple massage to a complex assortment of therapies – now, it has multiple and specialized applications. Making a career in Physiotherapy is a wise decision as the scope it covers is widening up and expected to offer numerous job options.

Physiotherapy is a type of medical science which is used to improve movement dysfunctions, to promote the functions of human body and optimal health. Physiotherapy is an important part of Rehabilitation dedicated to minimize disability among people. Physiotherapy is mainly recommended for the physically challenged people, the people suffering from degenerative disorders like arthritis, neurological disorders and sports persons. It is one of the rapidly growing areas of medicine that involves heat radiations, massages, tractions, hydrotherapy and short wave diathermy (SWD)

A graduate in Physiotherapy earns around Rs. 5,000 to 20,000 per month. However, the package differs from one company to the other. Higher remuneration can be expected with practice and experience.

How: As a Physiotherapist, you can have ample job opportunities in nursing homes, hospitals, rehabilitation centres, homes and private offices like private clinics etc. In addition to that, you can also work at an out-patient clinic, community healthcare centre, fitness centre, health club, primary healthcare centre, occupational healthcare centre, senior citizen centre or special school. Notwithstanding, physiotherapists have bright job prospects in sports centres, NGOs and colleges too. Some of the top notch recruiters for Physiotherapists include Talwalkars Pantaloon, HelpAge India, Hosmat Hospital,


A Physiotherapist should have personal qualities like tolerance, compassion, ability to work independently or in a team, excellent time management skills, interest in people, good communication skills, patience and empathy, physical fitness and good general health, problem solving skills, responsible and mature attitude towards the needs of patients.

Physiotherapy requires hard work and perseverance. It is a profession concerned with the health and well-being of patients. Anyone adopting for career in Physiotherapy must be able to encourage, reassure and persuade patients of the ultimate benefits of their treatment.

Anyone seeking admission in Physiotherapy must have completed 17 years of age and passed the 10+2 or equivalent examination, with Physics, Chemistry, Biology and English are eligible to apply for Bachelor of Physiotherapy (BPT) course. Eligibility for Master of Physiotherapy (MPT) course is 50 % marks in BPT with completion of six months internship. Study of Masters Course is related with research work, so one should have interest in such dedicated work.

Where: Health education and the prevention of injury and illness are becoming increasingly important. One example of this aspect of work is teaching relaxation techniques to expectant mothers and developing exercise programmes to help them regain muscle control/strength after giving birth. Prenatal and postnatal exercises are very beneficial for a woman during maternity period. Physiotherapists help and treat people of all ages with physical problems caused by illness, accident or ageing.


  • National Institute of Rehabilitation Training & Research-Cuttack
  • National Institute for the Orthopedically Handicapped -Calcutta.
  • Institute of Physically Handicapped, 4 Vishnu Digamber Marg, New Delhi.
  • College of Physiotherapy, Post Graduate Institute of Medical Research, Chandigarh.
  • Department of Sports Medicine and Physiotherapy, Guru Nanak Dev University, Amritsar

क्याः फिजियोथेरेपी या फिजिकल थेरेपी का इतिहास प्राचीन ग्रीस के हिप्पोक्रेट्स के युग में भी पाया जाता है। फिजियोथेरेपी को विभिन्न शारीरिक इलाज करने के सबसे पुराने तरीकों में से एक माना जाता है और इसमें साधारण मसाज से लेकर कई कॉम्प्लेक्स थेरपी भी शामिल है और अब इसके कई स्पेशलाइज्ड एप्लिकेशन भी हो गये हैं। फिजियोथेरेपी में करियर बनाना एक बेहतरीन निर्णय है क्योंकि इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसमें अंतंर्गत रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

फिजियोथेरेपी एक तरह की मेडिकल साइंस है जिसका उपयोग मूवमेंट के दोष को सुधारने, और बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी अंगो के सुचारु ढंग से काम करने को बढ़ावा दिया जाता है। फिजियोथेरेपी रिहेबिलेशन का अहम भाग है जिसके अंतर्गत विकलांगता के प्रभाव को कम करने की कोशिश की जाती है। फिजियोथेरेपी की सलाह मुख्य रूप से शारीरिक तौर पर विकलांग लोगों को, ऑर्थाराइटिस व न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से जूझ रहे लोगों को और खिलाड़ियों को दी जाती है। यह मेडिसीन के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है जिसमें हीट रेडिएशन, मसाज ट्रेक्शन, हाइड्रोथेरेपी और शॉर्ट वेव डाईथर्मी(एसडब्लूडी) शामिल हैं।

फिजियोथेरेपी में ग्रेजुएशन करने के बाद प्रतिमांह पाचं से बीस हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं। हालांकि पैकेज में कंपनी के अनुसार भिन्नता होती है। पर्याप्त अभ्यास व अनुभव हो जाने के बाद उच्च पारिश्रमिक की उम्मीद की जा सकती।

कैसेः एक फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर आप नर्सिंग होम्स, हॉस्पिट्ल्स, रिहेबिलेशन सेंटर्स, होम्स व प्राइवेट क्लीनिक जैसे निजी ऑफिसेज में काम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आपके पास आउट पेशेंट क्लीनिक, कम्युनिटी हैल्थ केयर सेंटर, फिटनेस सेंटर, हैल्थ क्लब, प्राइमरी हैल्थ केयर सेंटर, ऑक्यूपेशनल हेल्थ केयर सेंटर, सीनियर सिटिजन सेंटर्स या स्पेशल स्कूल्स में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा स्पोर्ट्स सेंटर्स, एनजीओ व कॉलेजों में भी फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए रोजगार की संभावनाएं है। फिजियोथेरेपिस्ट्स के शीर्ष नियोक्ताओं में तलवलकार्स पैंटालून, हेल्प एज इंडिया और हॉस्मेट हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।

एक फिजियोथेरेपिस्ट के अंदर धैर्य, सहानुभूति, अकेले या टीम में काम करने की क्षमता, उत्कृष्ट समय प्रबंधन का कौशल, लोगों में रुचि, अच्छे कम्युनिकेशन स्किल, फिजिकल फिटनेस, प्रॉबल्म सॉल्विंग स्किल्स और जिम्मेदारी जैसे व्यक्तिगत गुणों का होना बेहद आवश्यक है।

फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में कड़ी मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है। यह लोगों की सेहत व स्वास्थ्य से जुड़ा प्रोफेशन है। फिजियोथेरेपी को बतौर करियर चुनने वाले लोगों के अंदर मरीजों को अपने ट्रिटमेंट के लिए प्रोत्साहित व आश्वस्त करने में सक्षम होना चाहिए।

फिजियोथेरेपी में दाखिले के लिए इच्छुक छात्रों को बैचलर ऑफ फिजियोथेरपी (बीपीटी) करने के लिए न्यूनतम 17 वर्ष का होना अनिवार्य इसके साथ ही फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी व इंग्लिश के साथ 10$2 पास होना भी जरुरी है। मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (एमपीटी) के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप के साथ बीपीटी में 50ः अंक होना आवश्यक है है। मास्टर्स कोर्स की स्टडी रिसर्च वर्क से जुड़ी हुई होती है इसलिए अभ्यर्थियों को इस तरह के कार्यों में रुचि होनी चाहिए।

कहांः हेल्थ एजुकेशन और चोट व बीमारी से रोकथाम के क्षेत्र में तेजी से इजाफा हो रहे है। काम के इस पहलू का एक उदाहरण में गर्भवती महिलाओं के रिलेक्शेशन की तकनीक सिखाना और प्रसव के उपरांत उनको मांसपेशियों पर नियंत्रणध्ताकत हासिल करने में मदद करना भी शामिल है। प्रसव के पूर्व और प्रसव के बाद किया गया व्यायाम गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है। फिजियोथेरपिस्ट्स दवारा बीमारी, दुर्घटना या उम्र कि वजह से होने वाली शारीरिक समस्याओं के लिए सभी उम्र के लोगों की मदद की जाती है।
ऽ नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रिहेबिलेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च वर्क, कटक
ऽ नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ऑर्थियोपेडिकली हैंडीकैप्ड, कलकत्ता
ऽ इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिकली हैंडीकैप्ड, 4 विष्णु दिगंबर मार्ग, नई दिल्ली।
ऽ कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च, चंडीगढ़
ऽ डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसीन एंड फिजियोथेरेपी, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर

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