Career in Commercial Fine Arts / कमर्शियल फाइन आर्ट्स में करियर

What:  Development of fine arts was primarily for appreciation and expression of aesthetics. Its practical applications were considered to be negligible. But owing to the globalization, this is developing into a full-fledged profession providing employment to the artists like painters, sculptors etc. One has many options in Commercial and Fine Arts. There are various courses ranging from sculpture, applied arts, painting, craft, graphic interior design and painting. A professional and formal training can equip the person with various technical skills and a competitive edge in the industry.

Commercial Fine Arts happens to be a recent phenomenon in a country like India. It actually means the use of art media for the purpose of commercial functions. It is about converting the imaginary into reality through the use of creative concepts. Commercial fine arts as a career option aligns and nurtures the creativity within the individual, thereby giving a technical finesse and edge that has become the need of the hour for individuals to survive in the industry of arts.

Visualisers may earn from Rs.8000 to Rs.50000 p.m. An Assistant Art Director may earn from Rs.12000 to Rs.20000 p.m. An Art Director may earn from Rs.25000 to Rs.40000 p.m. Graphic designers in publishing houses, the print and electronic media and other e-learning businesses can command salaries going into the six-digit category. Working with media and publishing houses, advertising agencies and textile industries can get the candidates pay packages of Rs 12,000 to Rs 55,000 per month. Those who get employment in theatre, drama and production houses can get starting salary of Rs 8,000 to Rs 20,000 per month. Teachers can also earn well. 

How: Those entering in the field must have creativity, self-confidence and love for art. One should be sensitive to the environment around and should have great observational skills. One needs to be aware of the tastes, needs and changing trends of the times. The artist should be able to work in teams with great amount of communicational skills. They should have pragmatism, originality and skills to sell. One needs perseverance and the ability to accept criticism. In order to pursue Bachelor’s Degree in Fine Arts, one must complete the 10+2 level or equivalent, while to go for a Post Graduate program in Commercial Fine Arts, one must have a graduation degree in Fine Arts.

Bachelors program in commercial fine arts is 3 years course, divided into three parts consisting of one year each. The various things that are taught at the graduation level are the possible ways in which Fine Arts can be commercialized, how the arts and products can be commercialized, how the conversion of imaginary to reality made possible is and many more aspects.

Individuals in India with a Commercial Fine Arts degree can pursue a career in designing, advertisement industry, art studios etc. One can also go for designing of the non-verbal presentations for the various television shows that involve election results, trade figure analysis etc. The artist in fine arts can go for designing letter heads and stamps at the government organizations. They can work as Graphic Equalizers in software and advertisement companies. Commercial Fine Arts professionals can design cinema slides, technical catalogues, cinema slides, window slides and many more. Further they also have the opportunity to work as art directors in films and theaters. 

Where: Commercial Fine Arts as a career option would also allow you to work as a freelancer and design murals, portraits and also auction his drawings and creations at the exhibition. A career in Commercial Fine Arts open up wide career prospects for individuals, in countries like Italy, France, Germany etc. s these are the nations which have been the epitome of evolutionary changes when it comes to Commercial Fine Arts and have been producing maestros in this field. 

Institutions: (see below)

क्याः ललित कला का विकास मुख्य रूप से सौंदर्यशास्त्र की अभिव्यक्ति व प्रशंसा के लिए हुआ था। इसके व्यावहारिक उपयोग को नगण्य माना जाता था। लेकिन ग्लोबलाइजेशन के आगाज के साथ यह एक शानदार प्रोफेशन बन गया है जो पेंटर्स व स्कल्पचर्स जैसे आर्टिस्ट को रोजगार प्रदान करता है। इस क्षेत्र के अंतर्गत मूर्तिकला, अप्लाइड आर्ट्स, क्रॉफ्ट, ग्राफिक इंटीरियर डिजाइन और पेंटिंग जैसे विषयों में विभिन्न कोर्सेज उपलब्ध हैं। प्रोफेशनल और फॉर्मल ट्रेनिंग से व्यक्ति टेक्निकल स्किल्स को सीखता है जिसका उसे इंडस्ट्री में फायदा मिलता है।

भारत जैसे देश में कमर्शियल फाइन आर्ट्स का विकास हाल ही में होना शुरु हुआ है। इसका वास्तविक मतलब व्यावसायिक कार्यों के लिए आर्ट मीडिया के उपयोग से होता है। इस क्षेत्र में क्रिएटिव कॉन्सेप्ट्स के माध्यम से कल्पनाओं को हकीकत में तब्दील किया जाता है। कमर्शियल फाइन आर्ट्स को बतौर करियर चुनने से व्यक्ति के अंदर की क्रिएटिविटी की विकास होता है जिससे उनकी कला में निखार आता है जिसका फायदा उन्हे इंडस्ट्री में मिलता है।

विजुअलाइजर्स प्रतिमाह 8000 रुपये से 50,000 रुपये तक कमा सकते हैं। असिस्टेंट आर्ट डायरेक्टर प्रतिमाह 12000 से 20000 रुपये तक कमा सकते हैं। जबकी आर्ट डायरेक्टर्स की कमाई प्रतिमाह 25000 से 40000 रुपये तक होती है। पब्लिशिंग हाउसेज, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अन्य ई-लर्निंग बिजनेस के ग्राफिक डिजाइनर्स आसानी के साथ छह अंको में वेतन प्राप्त कर सकते हैं। मीडिया, पब्लिशिंग हाउसेज, एडवरटाइजिंग एजेंसी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते हुए प्रतिमाह 12,000 से 55,000 रुपये तक कमाया जा सकता है। जिन लोगों को थियेटर, ड्रामा और प्रोडक्शन हाउसेज में काम मिल जाता है वे हर महीने 8,000 रुपये से 20,000 रुपये तक कमाते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में टीचर्स की भी अच्छी आय होती है।

कैसेः इस क्षेत्र में प्रवेश करने वालों लोगों के अंदर क्रिएटिविटी, आत्म विश्वास और कला के प्रति प्रेम का होना आवश्यक है। कलाकार को अपने आसपास के वातावरण के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उनके अंदर अवलोकन करने की क्षमता भी होनी चाहिए। कलाकार को अच्छी कम्युनिकेशन स्किल के साथ टीम में काम करने में सक्षम होना चाहिए। उनके अंदर व्यावहारिकता, मौलिकता और बेचने की क्षमता का होना भी आवश्यक होता है। इसके अलावा कलाकार को आलोचना स्वीकार करने में भी सक्षम होना चाहिए। फाइन आर्ट्स में बैचलर्स की डिग्री के लिए अभ्यर्थी का 10$2 पास होना जरुरी होता है जबकी कमर्शियल आर्ट्स में पोस्टग्रेजुएशन प्रोग्राम के लिए फाइन आर्ट्स में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए।

कमर्शियल फाइन आर्ट्स में बैचलर प्रोग्राम एक तीन वर्षीय कोर्स होता है जिसको प्रत्येक वर्ष के हिसाब से तीन भागों में बांटा गया है। ग्रेजुएशन लेवल पर पढ़ाई जाने वाली विभिन्न बातों में फाइन आर्ट्स का कमर्शियलाइजेशन और कल्पना को हकीकत में तब्दील करने के विभिन्न पहलू भी शामिल हैं।

भारत में कमर्शियल फाइन आर्ट्स की डिग्री पूरी करने के बाद लोग डिजाइनिंग, एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री और आर्ट स्टूडियों जैसी जगहों पर काम कर सकते हैं। अगर कोई चाहे तो विभिन्न टेलीविजन शो के नॉन-वर्बल प्रेजेंटेशन की डिजाइनिंग का काम भी कर सकता है जिसमें इलेक्शन रिजल्ट व व्यापारिक आंकड़ो के विश्लेषण आदि होते हैं। फाइन आर्ट्स के कलाकार सरकारी विभागों के लेटर हेड व स्टाम्प की डिजाइनिंग का काम भी कर सकते हैं। व सॉफ्टवेयर और एडवरटाइजिंग कंपनियों में ग्राफिक इक्वेलाइजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। कमर्शियल फाइन आर्ट्स के प्रोफेशनल्स सिनेमा स्लाइड्स, टेक्निकल कैटलॉग्स, विंडो स्लाइड्स की डिजाइनिंग कर सकते हैं। इसके अलावा उनके पास फिल्मों व थियेटर्स में बतौर डायरेक्टर काम करने का मौका भी होता है।

कहांः कमर्शियल फाइन आर्ट्स के क्षेत्र को बतौर करियर चुनने के बाद आपके पास फ्रीलांसर के रूप में काम करते हुए प्रदर्शनी लगाकर अपने चित्रो व कृतियों को बेचने का भी विकल्प मौजूद होता है। कमर्शियल फाइन आर्ट्स को करियर के तौर पर चुनने से व्यक्ति के पास आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं होती हैं, इटली, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में कला को विकासवादी विचारधारा का प्रतीक माना जाता है और इन क्षेत्रों में कला जगत के कई दिग्गजों का निर्माण होता है।



  • University of Delhi, New Delhi
  • Jamia Milia Islamia, New Delhi
  • Faculty of fine Arts Banaras Hindu University, Varanasi
  • Banasthali Vidhyapeeth, Banasthali, Rajasthan
  • Calcutta University, Kolkata
  • University of Rajasthan , Jaipur
  • Rajasthan School of Arts, Jaipur

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