Career as Sports Coach and Instructor / स्पोर्टस कोच के रूप में करियर

What: Sports coaches help people participating in sports to work towards achieving their full potential. They may support professional sportspeople, sports teams, community teams or school groups, working with them closely to improve performance. They may also have a role in encouraging underrepresented groups or young people to participate in sporting activities.

Sports coaches bring out ability by identifying needs and planning and implementing suitable training programmes. Whatever the context, coaching involves developing the participants’ physical and psychological fitness and providing the best possible practical conditions in order to maximise their performance.

Coaches must be aware of their ethical and legal obligations to their clients. Many coaches combine coaching with other, often full-time, jobs. Many sports coaches work part time and unpaid, offering their coaching services on a purely voluntary basis. Governing bodies of various sports, professional sports clubs and educational institutions supported by public and private sector undertakings and local sports authorities hire national coaches. Opportunities vary from sport to sport.

As far as package is concerned a sports coach can get 15-20,000 in good schools / colleges or institution to start with.


How: Coaching roles vary hugely according to context, but typical work activities are likely to include: Performance management; Planning and administration. Assessing strengths and weaknesses in a participant’s performance and identifying areas for further development.

Performance management: Adapting to the needs and interests of the group or individual participant. Communicating instructions and commands using clear, simple language. Demonstrating an activity by breaking the task down into a sequence. Encouraging participants to gain and develop skills, knowledge and techniques. Ensuring that participants train and perform to a high standard of health and safety at all times. Inspiring confidence. Developing knowledge and understanding of fitness, injury, sports psychology, nutrition and sports science. Working with IT-based resources to monitor and measure performance.

Planning and administration: Producing personalised training programmes. Maintaining records of participant performance. Coordinating participants’ attendance at meetings and other sports events. Planning and running programmes of activities for groups and/or individuals. Transporting participants to and from training sessions and sports events. Seeking and applying for sponsorship agreements. Finding appropriate competitions for participants. Marketing and promoting your services, if you are self-employed. Planning your own work schedule.

Where: There is no formal qualification required for those aspirants who themselves have played the same or related sport up to a considerable level. Former and senior player of the sports can get the job straight way as assistant coaches owing to their knowledge and experience of the sport as a player. With some experience in the coaching as assistant coach, they can alleviate to the upper position as main coach or chief coach in due course of time.

Candidates who wish to apply for Bachelor degree in sports coaching should have passed 10+2 or equivalent examination securing a minimum of 50% marks (for some reputed institutions) in an aggregate preferably with physical education as one of the main subject at +2 level.

The Sports Authority of India (SAI) offers courses in sports coaching at its branches located at Patiala, Kolkata & Bangalore

क्याः स्पोर्टस कोच खिलाड़ियों को उनकी पूरी क्षमता का उपयोग करने में मदद करतें हैं।  प्रदर्शन में सुधार करने के लिए वे प्रोफेशनल खिलाड़ियों, स्पोर्टस टीमों, कम्यूनिटी टीमों स्कूल ग्रुप्स के साथ मिलकर काम करते हैं। किसी हताश खिलाड़ी की हौसलाफजाई करने या किसी हारी हुई टीम के मनोबल को बढ़ाने में भी कोच की अहम भूमिका होती है।

स्पोर्टस कोच खिलाड़ियों की उनकी जरूरत के अनुसार ट्रेनिंग देकर उनकी क्षमता को निखारने में मदद करते हैं। प्रत्येक परिस्थितियों में खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक विकास के साथ उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये उन्हे यथासंभव सबसे अच्छी स्थिति प्रदान करना भी कोचिंग के अंतर्गत आता है।

खेल प्रशिक्षकों को ग्राहकों के प्रति अपने नैतिक और कानूनी दायित्वों का पालन करना चाहिये। कई प्रशिक्षक कोचिंग के साथ कोई और फुल टाइम जॉब भी करते हैं। कई खेल प्रशिक्षक पार्टटाइम काम करते है और स्वैच्छिक आधार पर अवैतनिक सेवायें देते हैं। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के शैक्षिक संस्थानों, स्थानीय खेल संस्थाओं, प्रोफेशनल स्पोर्टस क्लब्स में स्पोर्टस कोचिंग के लिये राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की मदद ली जाती है। ये अवसर-अलग अलग खेलों के हिसाब से बदलते रहते हैं।

जहां तक ​​पैकेज का सवाल है एक स्पोर्टस कोच शुरुआती तौर पर किसी अच्छे स्कूल या कॉलेज में प्रतिमाह पन्द्रह से बीस हजार रुपये तक प्राप्त कर सकता है।

कैसे: खेल और खिलाड़ी की जरुरतो के अनुसार उनकी कोचिंग में भी काफी भिन्नता होती है लेकिन ज्यादातर कोचिंग गतिविधियों में जो दो चीजे शामिल होती हैं वह है: परफॉर्मेंस मैनजमेंट और प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन। खिलाड़ी के प्रदर्शन का आकलन और उसमें विकास के संभावनाओ की तलाश।

परफॉर्मेंस मैनजमेंट: किसी टीम या खिलाड़ी की जरूरतों को समझना। स्पष्ट, सरल भाषा का प्रयोग करते हुए दिशा-निर्देश देना। किसी काम को सिलसिलेवार तरीके से करना सिखाना। खिलाड़ियों को कौशल, ज्ञान और तकनीक को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना। ट्रेनिंग के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करना। आत्मविश्वास का संचार करना। फिटनेस, इंजरी, स्पोर्टस साइकॉलजी, न्यूट्रिशियन और स्पोर्टस साइंस की समझ होनी चाहिए। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को मापने के लिये आईटी आधारित संसाधनों का इस्तेमाल।

प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन: खिलाड़ियों की जरुरत के अनुसार ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाना और उनके प्रदर्शन के रिकॉर्ड को तैयार करना । मीटिंग्स और अन्य खेल स्पर्धाओं में प्रतिभागियों की उपस्थिति को सुनिश्चित करना। खिलाड़ियों एवं टीमों के लिये प्रोग्राम का निर्माण एवं कार्यान्वन। प्रशिक्षण सत्रों और खेल प्रतिस्पर्धाओं तक आनेजाने के लिये  खिलाड़ियो परिवहन की व्यवस्था। प्रायोजक की तलाश करना और इसके लिये आवेदन करना। प्रतिभागियों के लिए उपयुक्त प्रतियोगिताओं की तलाश करना, स्वरोजगार होने की स्थिति में अपने सेवाओं की मार्केटिंग व प्रमोशन। खुद के लिये कार्ययोजना तैयार करना।

कहां: जो लोग किसी खेल को एक सम्मानित स्तर तक खेल चुके होते है उन्हे कोच बनने के लिए किसी औपचारिक योग्यता कि आवश्यकता नहीं पड़ती। पूर्व और वरिष्ठ खिलाड़ी उस खेल के विषय में अपने अनुभव और जानकारियों के आधार पर सीधे सहायक कोच बन सकते हैं। और सहायक कोच के रूप में मिले अनुभव के साथ कुछ समय बाद कोई मुख्य कोच या चीफ कोच भी सकता है।

स्पोर्टस कोचिंग में बैचलर डिग्री के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 50 फीसदी अंको के साथ (कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए) 10+2 स्तर उतीर्ण होना चाहिये।

भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) पटियाला, कोलकाता और बंगलौर स्थित अपनी शाखाओं में स्पोर्टस कोचिंग के कोर्सेज उपलब्ध कराता है

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